आज में आप सभी को "मेरी हॉउस ओनर के साथ" की कहानी बताने जा रहा हूँ। यह उस समय की बात है जब में 19 साल का था। मे जिस मकान में रहता था, उसकी मकान मालकिन की उम्र करीब 40 साल थी, लेकिन वो इतनी उम्र होने के बाद भी एक बहुत ही खूबसूरत औरत थी और में उन्हे आंटी कहकर बुलाता था और उस आंटी का नाम प्रेमिला था और में उनकी सुन्दरता का दीवाना था, मुझे जब भी मौका मिलता था, में उनसे बात ज़रूर करता और इसी बहाने मुझे उनके गोरे गोरे बूबू को निहारने का मौका मिलता था और में आंटी के बूबू को देखकर एकदम पागल हो जाता था, क्योंकि उनके बूबू बहुत बड़े थे और साड़ी के आँचल से उनकी एक झलक ही मुझे मिल जाए तो में यही सोचकर उनसे बात करता था। फिर में बातों के बीच में उनके बड़े साईज़ के बूबू और कुले को देखता रहता और शायद धीरे-धीरे इस बात का अंदाजा आंटी को भी लग गया था कि में उन्हें गन्दी नज़र से देखता रहता हूँ।
अब आंटी अपने पल्लू को जानबूझ कर गिरा देती और गहरे गले के ब्लाउज से गोल गोल उनके बुबू दिख जाते, लेकिन सबसे अच्छी बात यह थी कि आंटी बहोत ही रोमांचित कर देने वाले कपडे पहेनती थी, जैसे कि जालीदार गहरे गले के ब्लाउज, जालीदार ब्लाउज से उनकी ब्रा भी साफ साफ दिखती थी और उनकी साड़ी भी नाभि से बहुत नीचे हुआ करती थी और में उनके अंग अंग का दीवाना था। उनके रसीले होंठ, मदमस्त कर देने वाले बूबू, नाभि, कुले और वो सब कुछ जो उनमे मौजूद था, वो मेरी रातो की रानी बन चुकी थी और में जब भी मुठ मारा करता था तो में उन्ही के बारे में सोचता था और में किस्मत वाला था कि मुझे आंटी के घर में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनके पति जब ऑफिस चले जाते थे, तब वो घर पर अकेली हुआ करती थी और ऐसे में जब मेरी उनसे मुलाकात हो जाती, तब में मौके का फ़ायदा उठाकर बहुत देर बातें करता था। उन पर क्या जवानी छाई हुई थी? 40 की उम्र होने के बाद भी वो एक हॉट बम थी। मेरा लुलु हर रोज उनके बारे में सोच सोचकर पानी छोड़ दिया करता था।
फिर एक बार मेरे मोम डेड को सात दिन के लिए हमारे किसी रिश्तेदार की सादी में जाना था और मेरी एक्जाम होने की वजह से मेने बहाना बना लिया, मुझे खाना बनाना नहीं आता था, इसलिए आंटी ने कहा कि में उन्ही के घर पर खाना खा लिया करूँ। फिर में उनकी यह बात सुनकर बहुत खुश था और वैसे भी इतना अच्छा मौका कौन गँवाना चाहेगा, तो में 8 बजे उनके घर जाता था और खाना खाने के बाद वापस अपने कमरे में चला आता था, उस वक़्त तक अंकल भी घर पर ही होते थे और फिर दो दिन बाद अंकल को कंपनी के काम से दिल्ली जाना पडा और अब आंटी घर पर बिल्कुल अकेली हो गयी। फिर में उस रात को भी हर रात की तरह 8 बजे आंटी के घर पहुँचा, आंटी ने दरवाज़ा खोला और हर बार की तरह वो बोली आ जाओ अंदर .... उनसे थोड़ी इधर उधर की बाते करते करते पता लग गया की आज फिर मुझे आंटी बहुत खुश नज़र आ रही हे, शायद उनको भी मेरे दिल की इच्छा का पता चल गया था और वो भी मेरे साथ बैठकर खाना खाने लगी और फिर खाना खाते-खाते अचानक से उनका पल्लू नीचे सरक गया और मुझे उनके बड़े-बड़े बूबू दिखने लगे और में तिरछी नजर से उनको देखता रहा, आंटी को भी मज़ा आ रहा था और उन्होंने पल्लू को नीचे गिराकर छोड़ दिया। फिर वो कहने लगी कि मुझे यह साड़ी बहुत परेशान करती है, मेरा तो जी करता है कि में इसे उतार दूँ। एक तो इतनी ज़्यादा गर्मी और ऊपर से यह साड़ी, यह कहते हुए उन्होंने साड़ी को निकाल दिया और अब वो ठीक मेरे सामने सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में थी और हमेशा की तरह उनका पेटीकोट नाभि से बहुत नीचे था और आंटी अब मुझ पर ज़ुल्म ढा रही थी, क्योंकि उनका अधनंगा जिस्म मेरी आँखों के सामने था और फिर आंटी अब दोबारा से खाना खाने बैठ गयी। फिर खाना खा लेने के कुछ देर बाद वो मुझसे बोली कि मुझे रात को अकेले में डर लगता है तो जब तक तुम्हारे अंकल नहीं आ जाते, तुम यंही घर पर ही रात को सो जाया करो। फिर में उनकी यह बात सुनकर मन ही मन खुशी से झूम उठा और में अपनी कुछ किताबें आंटी के घर ले आया और में सोच रहा था कि शायद मुझे दूसरे कमरे में सोना होगा और इसलिए मैंने किताबों को आंटी के रूम में ना रखकर पास वाले कमरे में रख दिया।
फिर आंटी ने कहा कि क्यों मेरे साथ सोने में तुम्हे क्या कोई आपत्ति है? प्लीज तुम मेरे साथ ही सो जाओ ना, तुम अपनी पढ़ाई करना और में भी वहीं सो जाऊंगी और जब तुम्हारा जी चाहे तो तुम भी वहीं सो जाना। फिर में आंटी के पास में सोने के ख्याल से बिल्कुल पागल हो रहा था, क्योंकि मैंने आज तक जिससे केवल बात की थी, मुझे आज उनके साथ सोने का मौका भी मिल रहा था और उस समय गर्मी बहुत ज़्यादा थी, इसलिए आंटी ने मुझसे कहा कि तुम अपनी शर्ट उतार दो। तुम इतनी गर्मी में केवल पेंट में भी रह सकते हो और में तो सोते वक़्त ब्लाउज भी नहीं पहनती, केवल ब्रा और पेटीकोट ही पहनती हूँ। फिर अचानक से आंटी के मुँह से ‘ब्रा’ जैसे शब्द सुनकर में बहुत रोमांचित हो गया और फिर क्या था, वो अपना ब्लाउज खोलने लगी और वो जैसे जैसे हुक खोलती जाती और उनके उभरे हुए बूबू बाहर आ जाते। फिर आख़िर में उन्होंने ब्लाउज खोल दिया और उसे एक तरफ फेंक दिया, ज़ालिम आंटी के बड़े बड़े कसे हुए बूबू देख के मेरा मुड बन रहा था, लेकिन मुझे संयम बनाए रखना था। फिर जैसे तैसे मैंने पढ़ाई में ध्यान लगाना शुरू किया और थोड़ी ही देर बाद आंटी बोली कि मेरी कमर में दर्द हो रहा है, अगर तुम बुरा ना मानो तो तेल से इसकी मालिश कर दो? तो यह बात सुनकर मेरा लुलु धीरे धीरे खड़ा होने लगा। फिर मैंने उसको ठीक किया और आंटी के करीब पहुँच गया। फिर आंटी बोली कि तुम बुरा मत मानना, में तुमसे मालिश करवा रहीं हूँ, क्या करें दर्द इतना ज़्यादा हो गया है। फिर मैंने कहा कि इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है, आपको जो काम करवाने है करवा लीजिए, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है। फिर क्या था? आंटी करवट बदल कर उल्टा सो गई और में उनके कमर की तरफ बेठ के तेल की शीशी लेकर आंटी की कमर की मालिश शुरू कर दी और उनके मक्खन की तरह कोमल बदन पर मेरे हाथ घूमने लगे और मेरा लुलु खड़ा होने लगा। फिर मैंने आंटी के शरीर को हाथ लगाते ही वो बोली हाँ कितना अच्छा लग रहा है, मेरे बदन की थकान जैसे कि तुमने खत्म कर दी। फिर वो बोली कि थोड़ा और नीचे दबाना और मेरे पेटीकोट को भी उतार दो। इससे तुम्हे मालिश करने में आसानी होगी और मुझे भी आराम मिलेगा। मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था, इसलिए मैंने कुछ नहीं किया तो इस पर आंटी बोली कि सोच क्या रहे हो पेटीकोट को उतार दो और फिर दोबारा ऐसा सुनते ही मैंने पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और उसे नीचे सरका दिया। उन्होंने रेड कलर की चडी पहेनी हुए थी, फिर आंटी के गोरे और गोल-गोल कुले मेरी आँखों के सामने थी और मैंने उनके कुले के आस पास मालिश शुरू कर दी और में उनकी कुले को धीरे-धीरे मसल रहा था और आंटी भी सिसकियाँ ले रही थी, उन्हे भी बहुत मज़ा आ रहा था। फिर वो बोली कि ज़रा ज़ोर से मसलो ना, दर्द बहुत ज़्यादा है और आज तुम्हे ही मेरे जिस्म के दर्द को खत्म करना है। फिर मैंने ज़ोर ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया और अब मुझे भी ऐसा करने से बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लुलु जो कोबरा की तरह खड़ा था, उसे में उनके पैर में रगड़ रहा था। और मुझे ऐसा लगा की आंटी सो गई है फिर मेंने उनके ऊपर चद्दर ओढा के अपनी पढाई की और करीब 12 बजे लाइट ऑफ करके उसी चद्दर में आंटी के साथ सो गया, पर मुझे नींद नहीं आ रही थी तो में थोड़ी देर करवटें बदलता रहा और चद्दर के अंदर से मेने अपना हाथ आंटी के ऊपर जाने दिया..
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उन्होंने कुछ कहा नहीं इसलिए मेने हिम्मत बढ़ाते हुए अपने लेफ्ट हठ से उनका लेफ्ट वाला बुबू दबाने लगा और पीछे से उनके कुले में अपना लुलु टच करता रहा, बहोत मजा आ रहा था तभी मुझे महेसुस हुआ की आंटी भी थोडा सरक के पीछे की तरफ आ रही है और मेरा साथ दे रही है तो मेने अपना लुलु चडी में से बहार निकाल कर उनकी चूची के पास रगड़ने लगा, तभी मुझे महसूस हुआ के आंटी अपना हाथ पीछे ले कर मेरे लुलु को अपने हाथ में ले लिया है और उसे ऊपर निचे कर रही है तो मेने भी हिम्मत बढाकर उनकी चड्डी थोड़ी साइड में करदी और उनको पीछे से जोर से चिपक गया और मेरा राइट वाला हाथ उनके सर के निचे से ले जाकर दोनों हाथो से उनके दोनों बुबू दबाने लगा तभी आंटी ने कुछ ना बोलते हुए अपने हाथो से मेरे लुलु को अपनी चूची में प्रवेश कराया और मेने धीरे धीरे हिलना सुरु कर दिया वोह भी मेरा साथ देते हुए धीरे धीरे हिल रही थी.. हम दोनों थोड़ी थोड़ी सिसकिया ले रहे थे और साथ में धीरी धीरी बेड की आवाज हिलने की वजह से आ रही थी... में उन्हें पीछे से चूम रहा था और करीब 10 मिनिट के बाद में अंदर ही जड गया और फिर तुरंत ही मेरी आंख लग गयी और में सो गया.. सुबह के करीब 5 बजे होंगे और मेरी नींद खुल गई चद्दर के अंदर से आंटी मेरा लुलु को चूस रही थी जिसकी वजह से वोह तन के खड़ा हो चूका था और मेने सोने का नाटक किया और सीधा लेटा रहा फिर आंटी चदर हटा के मेरे ऊपर चड के लुलु को अपनी चूची में सेट करके बेठ गई और ऊपर निचे होने लगी और मे भी बेड की आवाज के साथ मजे लेने लगा और आंटी ऊपर निचे होते हुए मेरे होंठो को चूसने लगी और धीरे धीरे सिसकिया लेने लगी करीब 10 मिनिट बाद में ज़ड गया और आंटी भी ज़ड चुकी थी और वोह चुप चाप चद्दर उअपर डाल के फिर से सो गई..
और 7 बजे के करीब फिर से मेरी आँख खुली तो आंटी किचन में थी में पुरे कपडे पहन कर बहार आया और आंटी से कहा की मुझे जाना होगा तैयार होके मेरा आज एक्जाम है !! तो आंटी ने कहा ठीक है पर चाय पि के जाओ और शाम को जल्दी आ जाना में डिनर के लिए वेट करुँगी मेने कहा ठीक है !! फिर में चाय पि के चला गया, हमारे बिच में रात क्या हुआ उसके बारे में कोई भी प्रकार की बात नहीं हुइ बस हमने एक दूसरे की जरुरत पूरी की और चले गए.. 3 दिन ऐसे ही चलता रहा रात को डिनर के बाद हम साथ में सो जाते और सुबह उठ कर में चल जाता फिर अगले दिन अंकल आने वाले थे इसलिए में सबके साथ डिनर करके चला गया और अपने घर जा कर सो गया और दूसरे दो दिन के बाद मरेर घरवाले भी आ गए!! में और आंटी अब भी कई बार बेठ के बात करते है पर हमारी जुबान पर वोह तीन रातों का जीकर कभी आया ही नहीं !!
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